Saturday, October 17, 2026
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शिक्षक सम्मान समारोह या राजनीतिक प्रचार का मंच? बेमेतरा में उठे सवाल

बेमेतरा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बेमेतरा दौरा संपन्न हो गया। इस दौरान जिले को करीब 183 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मिली। वहीं शिक्षक सम्मान समारोह में 81 सेवानिवृत्त शिक्षकों, 15 उत्कृष्ट शिक्षकों और 42 प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।

लेकिन कार्यक्रम के बाद अब शिक्षक सम्मान समारोह के स्वरूप को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षकों की बातें कम, राजनीतिक प्रचार ज्यादा?

बेमेतरा में शिक्षक सम्मान समारोह की शुरुआत से ही यह आयोजन एक गैर-राजनीतिक और शिक्षा-केंद्रित कार्यक्रम के रूप में होता आया है। लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा में शिक्षकों और विद्यार्थियों के सम्मान को ही कार्यक्रम का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है।

लेकिन इस बार समारोह का स्वरूप कुछ अलग नजर आया।

पहली बार शिक्षक सम्मान समारोह के साथ भूमि पूजन और लोकार्पण कार्यक्रम भी जोड़ा गया। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन हुआ, वहीं मंच से प्रधानमंत्री की योजनाओं, केंद्र सरकार की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े आयोजनों का भी उल्लेख किया गया।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस मंच की पहचान अब तक शिक्षकों के सम्मान और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े आयोजन के तौर पर रही है, वह इस बार कहीं राजनीतिक प्रचार के मंच में तो तब्दील नहीं हो गया?

शिक्षक सम्मान समारोह में उम्मीद होती है कि शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की समस्याएं, रिक्त पद, विद्यार्थियों की चुनौतियां और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

लेकिन इस बार मंच पर राजनीतिक उपलब्धियों और सरकारी योजनाओं के प्रचार की मौजूदगी ज्यादा दिखाई देने की बात सामने आई है।

इतना ही नहीं, शिक्षकों के सम्मान को लेकर भी कार्यक्रम के दौरान एक स्थिति ऐसी बनी, जिस पर सवाल उठे। मंच के किनारे कुछ शिक्षकों का सम्मान किया गया। बाद में सवाल उठने पर उन्हें मंच पर बुलाकर दोबारा सम्मानित किया गया। ऐसे में यह सवाल भी उठा कि आखिर शिक्षकों को शुरुआत से ही मंच पर सम्मानित क्यों नहीं किया गया?

सम्मान पाने वाले शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए निश्चित तौर पर यह दिन महत्वपूर्ण था। लेकिन जिस आयोजन की पहचान वर्षों से शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान से जुड़ी रही है, उसके स्वरूप में इस तरह का बदलाव अब चर्चा का विषय बन गया है।

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