
पूर्व छात्र-छात्राओं ने कहा कि विद्यालय में पढ़ाई के साथ शिक्षकों की डाँट, अनुशासन, सजा और हर कदम पर मिला प्रोत्साहन आज भी उनकी यादों का अहम हिस्सा है। उस समय शिक्षक की डाँट भले ही सख्त लगती थी, लेकिन आज समझ आता है कि उसमें भी विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य की चिंता और अपनापन छिपा था।
छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय गुरुजनों को देते हुए कहा कि आज वे जिस भी मुकाम पर हैं, उसमें शिक्षकों के मार्गदर्शन, शिक्षा और संस्कार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल पढ़ाते नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य का निर्माण करते हैं।
विद्यार्थियों की सफलता देखकर गौरवान्वित हुए गुरुजन
लंबे समय बाद अपने पढ़ाए हुए विद्यार्थियों को एक साथ सफल देखकर गुरुजन भी भावुक और गौरवान्वित नजर आए। शिक्षकों ने कहा कि उनके लिए इससे बड़ी खुशी और गर्व की बात नहीं हो सकती कि जिन बच्चों को कभी कक्षा में पढ़ाया और संस्कार दिए, वे आज जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता हासिल कर रहे हैं।

पूर्व छात्र-छात्राओं में कोई इंजीनियर है, कोई पत्रकार, कोई व्यवसायी, कोई ठेकेदार तो कोई अधिकारी के रूप में अपने क्षेत्र में पहचान बना रहा है। गुरुजनों ने कहा कि वर्षों बाद विद्यार्थियों के बीच लौटकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है और उनकी उपलब्धियों को देखकर शिक्षक जीवन की मेहनत सार्थक लग रही है।
विद्यार्थियों के साथ खुद बच्चे बन गए गुरुजन
समारोह के दौरान एक बेहद खुशनुमा पल भी देखने को मिला। गुरुजन अपने विद्यार्थियों के साथ खुद बच्चे बन गए और विभिन्न खेलों का आनंद लिया। हंसी-मजाक और खेल के बीच शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच वर्षों पुरानी आत्मीयता फिर दिखाई दी।

गुरुजनों और पूर्व छात्र-छात्राओं के चेहरे पर बचपन की वही खुशी नजर आई, जो कभी विद्यालय के दिनों में हुआ करती थी। यह पल समारोह के सबसे यादगार पलों में शामिल रहा।

प्रार्थना, सरस्वती वंदना और भोजन मंत्र से ताजा हुईं संस्कारों की यादें…
कार्यक्रम के दौरान पूर्व छात्र-छात्राओं ने सरस्वती शिशु मंदिर में होने वाली प्रार्थनाओं को भी याद किया। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले सभी ने मिलकर सरस्वती वंदना की, वहीं भोजन शुरू करने से पहले भोजन मंत्र का सामूहिक गायन किया। इन परंपराओं के माध्यम से पूर्व छात्र-छात्राओं ने विद्यालय में मिले संस्कारों और अनुशासन को फिर से जीवंत किया।

पुराने विद्यालय पहुंचकर फिर लौट आया बचपन
समारोह के बाद पूर्व छात्र-छात्राएँ और शिक्षक अपने पुराने विद्यालय सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे। सभी ने विद्यालय का भ्रमण किया और अपनी पुरानी कक्षाओं में जाकर कुछ समय बिताया।

जिस कक्षा में कभी बैठकर पढ़ाई की थी, वर्षों बाद उसी कक्षा में बैठते ही पुरानी यादें ताजा हो गईं। किसी ने अपनी पुरानी सीट को याद किया तो किसी ने सहपाठियों के साथ बिताए किस्से साझा किए। डाँट, प्रार्थना, खेल, पढ़ाई और शिक्षकों के साथ बिताए पुराने दिन एक बार फिर यादों में जीवंत हो उठे।
ऐसा लगा मानो समय कुछ पलों के लिए पीछे लौट गया हो और सभी पूर्व छात्र-छात्राएँ अपने बचपन में वापस पहुंच गए हों। शिक्षकों के साथ पुरानी कक्षा में बैठना समारोह का सबसे भावुक और यादगार पल रहा।

पूर्व छात्र-छात्राओं ने कहा, “हमारी सफलता में हमारे माता-पिता के साथ हमारे गुरुजनों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। आज का यह सम्मान हमारे लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।”
इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व प्राचार्य बलराम ठाकुर सहित मनराखन निषाद, गुलाब साहू, बालहरी देवांगन, लक्ष्मी यादव, कुमुद शर्मा, गोपी शर्मा, लक्ष्मण साहू, प्रमोद तिवारी, धर्मेंद्र शर्मा, योगेश्वर सोनी, राजू शर्मा, कौशल वर्मा, रवि वर्मा, प्रेम तिवारी एवं वैष्णव आचार्य जी सहित अन्य गुरुजन उपस्थित रहे।



